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#Long_Thread
भगवान सदैव अपने भक्तों की सुनते हैं, और उसका उदाहरण आपके सामने रख रहा हूँ जिसे पढ़ कर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे।

दिनांक: 1 नवंबर 1979

समय: रात्रि 1 बजे

स्थान: तिरुपति मंदिर, आंद्र प्रदेश

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पूरा तिरुपति शहर और स्वयं भगवान श्रीमन्नारायण भी शयन कर रहे थे और घनघोर शांत रात्रि थी की इतने में ही…

ठंन्न ठंन्न ठंन्न ठंन्न!

तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के श्रीविग्रह के ठीक आगे जो बड़ा सा घंट है वो अपने आप हिलने लगा..

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और उस घंट नाद से पूरा तिरुपति शहर एकदम आश्चर्य में भरकर उठ खड़ा हुआ।

मंदिर रात्रि 12 बजे पूर्ण रूप से बंद हो गया था, फिर ये कैसी घंटा नाद की ध्वनि आ रही है?
कोई भी जीवित व्यक्ति मंदिर में रात्रि 12 के बाद रहना संभव नही, तो फिर किसने ये घंटा नाद किया?

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कोई जीव-जंतु मंदिर में प्रवेश नही कर सकते क्योंकि सारे द्वार बंद है, तो फिर ये कौन है?
मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पी वी आर के प्रसाद के नेत्रो में अश्रु थे क्योंकि केवल वे जान पा रहे थे कि ये केवल घंटा नाद नही है..

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ये भगवान ने अपना संकेत दे दिया है मेरे "वरुण जाप" की सफलता के लिए।

भगवान के सभी भक्त यह घटना बड़ी श्रद्धा से पढ़ें :-

यह अलौकिक दिव्य चमत्कारी घटना सन् 1979 नवंबर माह की हैं।

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#Thread

रुद्री क्या है..?

रुद्री के बारे में हम सभी ने कहीं न कहीं सुना होगा कि इस शिव मंदिर में आज रुद्री या लघुरुद्र है। रुद्री ब्राह्मणों के साथ-साथ शिव उपासकों के लिए शिव को प्रसन्न करने का एक उत्कृष्ट पाठ है।

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रुद्री के बारे में कहा जाता है
"रुत द्रव्यति इति रुद्र"
अर्थात् रुत अर्थात दुःख और शोक का कारण, जो मिटा दे, नष्ट कर दे वह रुद्र है और ऐसे शिव के रुद्र रूप को प्रसन्न करने का मंत्र रुद्र है।

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वेदों में रुद्र के बारे में जो मंत्र हैं उन्हें शुक्ल यजुर्वेदीय, कृष्ण यजुर्वेदीय, ऋग्वेदीय मंत्र कहा गया है। सौराष्ट्र - शुक्ल यजुर्वेदिक रुद्र मंत्र गुजरात में अधिक प्रचलित हैं। रुद्र के इस भजन को अष्टाध्यायी कहा जाता है क्योंकि रुद्री में आठ मुख्य अध्याय हैं।

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इस भजन में रुद्र की आठ मुख्य मूर्तियाँ हैं पृथ्वी, जल, प्रकाश, वायु, आकाश, चंद्रमा, सूर्य और आत्मा। इसके रूपों का वर्णन मिलता है।

मोटे तौर पर इन अध्यायों में:
- पहला अध्याय गणपति का भजन है।
- दूसरा अध्याय भगवान विष्णु की स्तुति है।

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- तीसरा अध्याय इंद्र की स्तुति है।
- चौथा अध्याय सूर्यनारायण का स्तोत्र है।
- पांचवां अध्याय रुद्र के स्तोत्र का हृदय है।
- छठा अध्याय मृत्यु स्तोत्र है।
- सातवें अध्याय में भगवान मारुत का भजन है और,
- आठवां अध्याय अग्नि देवता का स्तोत्र है।

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#Thread
कौन से ऋषि का क्या है महत्व:

अंगिरा ऋषि :-

ऋग्वेद के प्रसिद्ध ऋषि अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र थे। उनके पुत्र बृहस्पति देवताओं के गुरु थे। ऋग्वेद के अनुसार, ऋषि अंगिरा ने सर्वप्रथम अग्नि उत्पन्न की थी।

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विश्वामित्र ऋषि :-

गायत्री मंत्र का ज्ञान देने वाले विश्वामित्र वेदमंत्रों के सर्वप्रथम द्रष्टा माने जाते हैं। आयुर्वेदाचार्य सुश्रुत इनके पुत्र थे। विश्वामित्र की परंपरा पर चलने वाले ऋषियों ने उनके नाम को धारण किया। यह परंपरा अन्य ऋषियों के साथ भी चलती रही।

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वशिष्ठ ऋषि :-

ऋग्वेद के मंत्रद्रष्टा और गायत्री मंत्र के महान साधक वशिष्ठ सप्तऋषियों में से एक थे। उनकी पत्नी अरुंधती वैदिक कर्मो में उनकी सहभागी थीं।

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कश्यप ऋषि :-

मारीच ऋषि के पुत्र और आर्य नरेश दक्ष की १३ कन्याओं के पुत्र थे। स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इनसे देव, असुर और नागों की उत्पत्ति हुई।

जमदग्नि ऋषि :-

भृगुपुत्र यमदग्नि ने गोवंश की रक्षा पर ऋग्वेद के १६ मंत्रों की रचना की है।

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केदारखंड के अनुसार, वे आयुर्वेद और चिकित्साशास्त्र के भी विद्वान थे।

अत्रि ऋषि :-

सप्तर्षियों में एक ऋषि अत्रि ऋग्वेद के पांचवें मंडल के अधिकांश सूत्रों के ऋषि थे। वे चंद्रवंश के प्रवर्तक थे। महर्षि अत्रि आयुर्वेद के आचार्य भी थे।

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#MN908947 #2019_nCov #GISAID #CHINACDC

GISAID Submission date dispute👇
https://t.co/yx666wb6dO
Yong-Zhen Zhang's Genbank submission


@seeshawn @strom_m @edwardcholmes @arambaut @Ayjchan This dispute on 'first open' is getting 'better'. GISAID formally wrote to authors who acknowledged Virological post as world's first release of 2019ncov, penalised authors of MN908947, didn't ID who...... 1/3

Supposedly from Fudan or UoS, ACCESSED and KNEW IVDC's 'initial' submission of IVDC-01/05 on GISAID on 10th Jan, 2020, via login records of his/her/theirs GISAID account credentials. Hence as a point to point rebuttal to 'pressure' & 'urge' to release the fastaqc file... 2/3

on 11th Jan(initiated very late on 10th Jan UTC) according to the well known narratives in global academic society and Nature/TIME stories. 3/3

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