#AYA

1. Beloved Ones Of My Heart!

With A Breath Of Sacred Light, I Observe And Bow At Your Ongoing Perseverance To Find The Path Of Freedom! Since The Arrival To The Earth School, You Have Done Your Best To Learn And Grow Through It All!

More from Kab

More from Life

It doesn't happen because you want it to happen.

It doesn't happen because you made it happen.

It happens because you allow it to happen.

https://t.co/j5hPyw9m9m

You May Also Like

Following @BAUDEGS I have experienced hateful and propagandist tweets time after time. I have been shocked that an academic community would be so reckless with their publications. So I did some research.
The question is:
Is this an official account for Bahcesehir Uni (Bau)?


Bahcesehir Uni, BAU has an official website
https://t.co/ztzX6uj34V which links to their social media, leading to their Twitter account @Bahcesehir

BAU’s official Twitter account


BAU has many departments, which all have separate accounts. Nowhere among them did I find @BAUDEGS
@BAUOrganization @ApplyBAU @adayBAU @BAUAlumniCenter @bahcesehirfbe @baufens @CyprusBau @bauiisbf @bauglobal @bahcesehirebe @BAUintBatumi @BAUiletisim @BAUSaglik @bauebf @TIPBAU

Nowhere among them was @BAUDEGS to find
महाभारत की कहानी कौन नहीं जानता।लेकिन क्या आपको पता है कि महाभारत के ज्यादातर पात्र किसी न किसी श्राप में फंसे थे।अगर ये श्राप न होते तो कदाचित महाभारत की कहानी कुछ और होती।हिन्दु पौराणिक ग्रंथों में विभिन्न श्रापों का वर्णन मिलता है व हर श्राप के पीछे कोई कहानी अवश्य होती है।


आइए आज जानते हैं महाभारत कथा में वर्णित कुछ श्रापों के बारे में।

1) राजा पाण्डु को ऋषि किन्दम का श्राप

एकबार महाराज पाण्डु शिकार खेलने वन गए।झाडियों के पीछे कुछ हिल रहा था। मृग है सोचकर राजा ने बाण चलाया जो जाकर ऋषि किन्दम और उनकी पत्नी को लगा।वे दोनो रति-क्रीड़ा में लिप्त थे।

जब राजा ने उन्हें देखा तो बहुत दुखी हुए कि ये मुझसे क्या पाप हो गया।बहुत क्षमा याचना के बाद भी किन्दम ऋषि ने पाण्डु को श्राप दे दिया कि जब भी वो किसी स्त्री को काम भावना से स्पर्श करेंगे उसी क्षण उनकी मृत्यु हो जाएगी।पश्चाताप करने, वे सिंहासन पे अन्धे राजा धृतराष्ट्र को बैठाकर...


..स्वयं अपनी रानियों कुंती व माद्री के साथ वन चले गए।पांडवों का जन्म भी कुंती को ऋषि दुर्वासा द्वारा दिए गए मंत्र से हुआ था जिसमे किसी भी देव का स्मरण कर उस देव से कुंती,पुत्र प्राप्त कर सकती थी।एक बार माद्री पे मोहित हो जब पांडु ने उसे स्पर्श किया,उसी क्षण पांडु की मृत्यु होगयी।


2) उर्वशी का अर्जुन को श्राप

महाभारत युद्ध से पहले जब अर्जुन दिव्यास्त्र प्राप्त करने स्वर्ग गए तो वहां उर्वशी नाम की अप्सरा उन पर मोहित हो गयी। अर्जुन ने जब उन्हें अपनी माता के समान बताया तो यह सुनकर उर्वशी क्रोधित हो गयी और अर्जुन को श्राप दे डाला कि तुम नपुंसक की भांति...