श्रीहनुमान रुद्र के ग्यारहवें अवतार हैं. वे कई गुणों, सिद्धियों और अपार बल के स्वामी हैं. इस चौपाई के अनुसार यह ‘अष्टसिद्धि’ माता सीता के आशीर्वाद से श्रीहनुमान जी को अपने भक्तों तक पहुंचाने को भी मिली है
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता ।
अस वर दीन्ह जानकी माता ।।
“अष्ट सिद्धि” कौन सी हैं वो अष्ट सिद्धियां जिनके दाता महाबली हनुमान बताए गए हैं!
तुलसीदास जी द्वारा लिखी गई हनुमान चालीसा के इस दोहे को आपने न जाने कितनी बार सुना और दोहराया होगा
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श्रीहनुमान रुद्र के ग्यारहवें अवतार हैं. वे कई गुणों, सिद्धियों और अपार बल के स्वामी हैं. इस चौपाई के अनुसार यह ‘अष्टसिद्धि’ माता सीता के आशीर्वाद से श्रीहनुमान जी को अपने भक्तों तक पहुंचाने को भी मिली है
ये हैं वे आठ सिद्धियां और उनसे होने वाले चमत्कारों का वर्णन
(1) अणिमा (2) महिमा (3) गरिमा (4) लघिमा (5) प्राप्ति (6) प्राकाम्य (7) ईशित्व (8) वशित्व ।
महाबली हनुमान जी द्वारा प्रदान की जाने वाली ये सिद्धि बड़ी ही चमत्कारिक है। इस सिद्धि के पूर्ण हो जाने पर इंसान कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकता है। इस सिद्धि का उपयोग स्वयं महाकपि ने भी किया था। हनुमान जी ने इस सिद्धि का प्रयोग करते हुए ही
2- महिमा
इस सिद्धि को साध लेने वाला मनुष्य अपने शरीर को कई गुना विशाल बना सकता है।
अष्ट सिद्धियों के क्रम में तीसरी सिद्धि है, ये वो सिद्धि है जिसके पूर्ण होते ही इसके साधक अपना वजन किसी विशाल पर्वत से भी ज्यादा कर सकता है।
महाभारत ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि अपने बल के घमंड में चूर कुंती पुत्र भीम के गर्व को हनुमान जी ने चूर-चूर कर दिया था।
4- लघिमा
इस सिद्धि के पूर्ण हो जाने पर साधक अपना भार मयूर पंख से भी हल्का कर सकता है।
अष्ट सिद्धियों में से पांचवीं सिद्धि है'। इसके बल पर साधक भविष्य में झांक सकता है और पशु-पक्षियों की भाषा समझ सकता है। सीता माता की तलाश में निकले महाबली हनुमान जी ने इसी सिद्धि को साधते हुए कई जंगली पशु-पक्षियों से माता सीता का पता भी पूछा था
यह सिद्धि अविश्वसनीय चमत्कार करने की ऊर्जा प्रदान करती है। ये वही सिद्धि है जिसके प्रताप के कारण स्वयं महाबली हनुमान जी चिरकाल तक जीवित रहेंगे और अपनी इच्छा से कोई भी रूप धारण करते हैं