#प्राचीनहनुमानमंदिर
प्राचीन हनुमान मंदिर, महाभारत काल से बाल हनुमान को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है। यह दिल्ली में पांडवों द्वारा स्थापित पांच मंदिरों में से एक माना जाता है।
दिल्ली का ऐतिहासिक नाम इंद्रप्रस्थ शहर है,

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जो यमुना नदी के तट पर पांडवों द्वारा महाभारतकाल में बसाया गया था तथा तब पांडव इंद्रप्रस्थ और कौरव हस्तिनापुर पर राज्य करते थे।हिन्दू मान्यता के अनुसार पांडवों में भीम को हनुमानजी का भाई माना जाता है।दोनों ही वायुपुत्र कहे जाते हैं और उनकी हनुमान जी पर असीम आस्था थी।
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इसका जीर्णोद्धार दो बार कराया गया -
1540 - 1614 महाराजा मानसिंह प्रथम
1688 - 1743 जय सिंह द्वितीय
वर्तमान हनुमान मंदिर का स्वरूप सन 1724 में श्रद्धालुओं के सम्मुख आया जब जयपुर रियासत के महाराज जयसिंह ने इसका फिर से जीर्णोद्धार करवाया था।
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इस मंदिर के इतिहास के संबंध में कहते है कि राजा जयसिंह मौजूदा हनुमान मंदिर परिसर में अपने किसी भवन का निर्माण करवा रहे थे। उस दौरान यहां पर स्वयंभू हनुमान की मूर्ति प्रकट हुई थी। इसमें हनुमानजी दक्षिण दिशा की ओर देख रहे हैं। इसमें उनकी सिर्फ एक ही आंख दिखाई दे रही है।
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अतः ये दक्षिणामुखी हनुमान जी भी कहलाते है।
यहाँ के महंत मंदिर की पिछली 33 पीढ़ियां से सेवा करते आ रहे हैं और इनका परिवार आमेर के राजा जयसिंह के आमंत्रण पर सन् 1724 में यहां आया था।
महंत मदन लाल शर्मा:
महंतजी की ही पहल पर हनुमान मंदिर में 1 अगस्त,1964 से
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‘श्रीराम जयराम, जय-जयराम’ मंत्र का अटूट जाप आरंभ हुआ था।
वे मंदिर आनेवाले भक्तों को हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए प्रेरित करते थे और मंदिर परिसर में लाखों हनुमान भक्तों के साथ हनुमान चालीसा या सुंदर कांड का पाठ किया था।
उन्होंने यहां पर पंचमुखी हनुमानजी की मूर्ति की भी
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स्थापना करवाई। पंचमुखी हनुमान की मूर्ति में मारुति नंदन का कठोर रूप दिखाया गया है। यह अपने आप में दुर्लभ कलारूपों में एक हैं, जहां वे किसी राक्षस का वध कर रहे हैं। वे बताते थे कि सिर्फ पंचमुखी हनुमान जी की मूर्ति में ही वे भयावह रूप में दर्शाए गए हैं। शेष में हनुमान जी अपने
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अपने राम की भक्ति में नजर आते हैं।

भगवन की आराधना में जलने वाली अखंड ज्योति यहां हमेशा जलती रहती है।
दीपावली, हनुमान जयंती, जन्माष्टमी, और शिवरात्रि के दिन मंदिर में बाल हनुमान का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दिन भगवान को सोने का श्रंगार किया जाता है।
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मंगलवार और शनिवार भगवान हनुमान के पूजन के दो विशेष दिन हैं। इन दिनों में मंदिर 24 घंटे के लिए खुला होता है।
शिल्पकला की दृष्टि भी ये मंदिर बेहद उत्कृष्ट कोटि का है। इसके मुख्य द्वार का वास्तुशिल्प रामायण में वर्णित कला के अनुरूप है। मुख्य द्वार के स्तंभों पर
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संपूर्ण सुंदरकांड की चौपाइयां खुदी हुई हैं। ऐसा माना जाता है कि रामचरित मानस जैसा ऐतिहासिक धर्मग्रंथ लिखने वाले गोस्वामी तुलसीदास जी 16वीं सदी में जब दिल्ली आए तब वे इस मंदिर में भी दर्शन को आए थे। कहा जाता है कि यही वो पवित्र स्थान है जहां से उन्हें
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हनुमान चालीसा लिखने की प्रेरणा मिली।
ऐसा भी माना जाता है कि जो भक्त मन में साध लिए सात शनिवार तक लगातार यहां परिक्रमा करने आता है वो भक्त निश्चय ही मनोवांछित फल पाता है।
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मुगल शासकों के दौर में इस मंदिर पर कई आक्रमण होने की भी कहानियां भी मंदिर के महंत और श्रद्धालु सुनाते हैं। लेकिन अपने आप में ये बात भी उतनी ही चमत्कार और श्रद्धापूर्ण है कि हनुमान मंदिर के इस बालरूप को कभी भी कोई क्षति नहीं पहुंचा सका।
एक कथा के अनुसार जब अकबर तक यह खबर पहुंची
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तो उन्होंने तुलसीदास जी को दरबार में आने का आदेश भेजा तथा कोई चमत्कार दिखाने को कहा। मुगल शासक की मांग बेहद कठिन थी मगर बताया जाता है कि संत तुलसी दास जी ने उन्हें पूर्ण संतुष्ट किया। इसके बाद अकबर ने हनुमान मंदिर के शिखर पर इस्लामी चंद्रमा एवं किरीट कलश समर्पित किया था...
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जो आज भी देखा जा सकता है।
इसके उपरांत मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कभी भी इस मंदिर पर कोई हमला नहीं किया
मंदिर में'श्री राम,जय राम,जय जय राम'मंत्र का जप 1अगस्त1964 से लगातार 24घंटे किया जा रहा है,इस कारण मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है
Source:Various Articles

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#श्रीकिलकारीबाबाभैरवनाथ जी पांडवों कालीन मंदिर, बाबा भैरव नाथ जी को समर्पित हैं, जोकि भगवान शिव का एक उग्र अवतार माने जाते हैं।
माना जाता है कि महाभारत के युद्ध से पहले भीम ने इस क्षेत्र में निवास करते हुए सिद्धियाँ प्राप्त की थी।
महाभारत युद्ध जीतने के बाद,पांडवों,..
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विशेषकर भीम ने इस क्षेत्र में मंदिर बनाने की शुरुआत की थी।
प्राचीन मंदिर के दो अलग-अलग खंड हैं जिनमे से एक #दुधियाभैरवमंदिर जहाँ दूध चढ़ाया जाता है,और दूसरा #किलकारीभैरवमंदिर है जहाँ शराब अर्पित की जाती है।
दुधिया भैरव मंदिर में भक्तों द्वारा बाबा भैरव नाथ पर कच्चा ..


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(बिना पका) दूध चढ़ाया जाता हैं।
किलकारी भैरव मंदिर एकमात्र मंदिर है जहाँ भक्त प्रभु को शराब चढ़ा सकते हैं। यह शराब भक्तों को स्थानीय प्रसाद के रूप में वितरित भी की जाती है। परंतु यहां मदिरा बेचने पर प्राबंधी है।
दुधिया भैरव मंदिर के महंत के अनुसार, किलकारी भैरव नाथ मंदिर


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मंदिर मे शराब चढ़ाने का कारण है कि लोग शराब की आदत छोड़ने पर अंतिम शराब भगवान पर प्रतिज्ञा के रूप में अर्पित करते हैं, तथा प्रार्थना करते है कि प्रभु उनकी इस बुरी आदत का अर्पण स्वीकार करें।
यह भक्त के ऊपर निर्भर करता है कि वो दूध अथवा मदिरा अर्पण करना चाहते है।

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इस मंदिर में सभी मूर्तियों का निर्माण संगमरमर से किया गया है।
मंदिर के मुख्य देवता, भगवान भैरव, जिनका केवल चेहरे ही हैं और बहुत बड़ी आँखें हैं।
भगवान भैरव को सिद्धियों के भंडार के रूप में भी जाना जाता है। अतः तांत्रिक सिद्धियों में रुचि रखने वाले भक्त यहाँ नियमित रूप से बाबा
#जयमाँझंडेवाली
राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित झंडेवालान एक सिद्धपीठ है।
यह प्राचीन मंदिर अरावली पर्वत की श्रृंखलाओं में से एक श्रृंखला में स्थित है।
मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है
माता झंडेवाली यहाँ माँ लक्ष्मी के स्वरूप में विद्यमान हैं जिनके एक तरफ मां काली हैं..1


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और दूसरी तरफ मां सरस्वती हैं।
मंदिर के इतिहास की बात करें तो 100 साल से भी पहले दिल्ली के एक व्यापारी श्री बद्री भगत थे,जो धार्मिकवृत्ति के तथा वैष्णों माता के परम भक्त थे।
बद्री दास जी इस जगह नियमित रूप से सैर करने आते थे तथा यही पर ध्यान में लीन हुआ करते थे।


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एक दिन जब बद्री दास मां भगवती की साधना में लीन थे तो उन्हें अनुभूति हुई कि यहां पर एक प्राचीन मंदिर है जो कि जमीन में धंसा हुआ है।
कुछ समय बाद उन्हें फिर सपने में वह मंदिर दिखाई दिया।
बद्री दास जी ने वहां जमीन खरीद कर, खुदाई आरम्भ करवाई।
थोड़ी ही खुदाई के पश्चात्‌ मंदिर के..


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अवशेष मिलने प्रारम्भ हो गए। इसके पश्चात्‌ खुदाई का कार्य तेज करवा दिया गया। खुदाई करवाते समय उन्हें मंदिर के शिखर पर झंडा दिखा, और उसके बाद खुदाई में माँ की मूर्ति प्राप्त हुई। मगर खुदाई में माँ के हाथ खंडित हो गए।
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दूसरी चट्टान की खुदाई में शिवलिंग दिखाई पड़ा, मगर खंडित ना हो इस भय से उसे वही रहने दिया गया, आज भी वह शिवलिंग मंदिर की गुफा में स्थित है।
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