Want to make a Machine Learning project but need guidance?

Here are Five Youtube Tutorials on how to make a Face Detection Algorithm🚀

Thread 🧵👇

1⃣ @nehay01

Face Recognition using OpenCV in Python :

1. Detect Face
2. Generated labels for training data & train classifier 3. Predict image.

🔗https://t.co/p3YGJ9YgOQ
2⃣ @edurekaIN

This Edureka Python Tutorial video on OpenCV explains all the basics of OpenCV. It also explains how to create a face recognition system and motion detector.

🔗https://t.co/iMKycbRMW4
3⃣ @adarsh_menon_

He explains how you can detect faces in images as well as videos using Haar Cascades in OpenCV and Python.

🔗https://t.co/lb7y98guv4
4⃣ Balaji Srinivasan

In this Python programming video, you will learn to build a Face Mask Detector using Keras, Tensorflow, MobileNet, and OpenCV

🔗https://t.co/qeVyFTGpOA
5⃣@joincfe

How to use OpenCV in Python for Face Recognition and Identification

🔗https://t.co/TkikijHhA0
Hey 👋

Thanks for reading the thread ❤️

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https://t.co/WeRnvNSRST

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#தினம்_ஒரு_திருவாசகம்
தொல்லை இரும்பிறவிச் சூழும் தளை நீக்கி
அல்லல் அறுத்து ஆனந்தம் ஆக்கியதே – எல்லை
மருவா நெறியளிக்கும் வாதவூர் எங்கோன்
திருவாசகம் என்னும் தேன்

பொருள்:
1.எப்போது ஆரம்பித்தது என அறியப்படமுடியாத தொலை காலமாக (தொல்லை)

2. இருந்து வரும் (இரும்)


3.பிறவிப் பயணத்திலே ஆழ்த்துகின்ற (பிறவி சூழும்)

4.அறியாமையாகிய இடரை (தளை)

5.அகற்றி (நீக்கி),

6.அதன் விளைவால் சுகதுக்கமெனும் துயரங்கள் விலக (அல்லல் அறுத்து),

7.முழுநிறைவாய்த் தன்னுளே இறைவனை உணர்த்துவதே (ஆனந்த மாக்கியதே),

8.பிறந்து இறக்கும் காலவெளிகளில் (எல்லை)

9.பிணைக்காமல் (மருவா)

10.காக்கும் மெய்யறிவினைத் தருகின்ற (நெறியளிக்கும்),

11.என் தலைவனான மாணிக்க வாசகரின் (வாதவூரெங்கோன்)

12.திருவாசகம் எனும் தேன் (திருவா சகமென்னுந் தேன்)

முதல்வரி: பிறவி என்பது முன்வினை விதையால் முளைப்பதோர் பெருமரம். அந்த ‘முன்வினை’ எங்கு ஆரம்பித்தது எனச் சொல்ல இயலாது. ஆனால் ‘அறியாமை’ ஒன்றே ஆசைக்கும்,, அச்சத்துக்கும் காரணம் என்பதால், அவையே வினைகளை விளைவிப்பன என்பதால், தொடர்ந்து வரும் பிறவிகளுக்கு, ‘அறியாமையே’ காரணம்

அறியாமைக்கு ஆரம்பம் கிடையாது. நமக்கு ஒரு பொருளைப் பற்றிய அறிவு எப்போதிருந்து இல்லை? அதைச் சொல்ல முடியாது. அதனாலேதான் முதலடியில், ஆரம்பமில்லாத அஞ்ஞானத்தை பிறவிகளுக்குக் காரணமாகச் சொல்லியது. ஆனால் அறியாமை, அறிவின் எழுச்சியால், அப்போதே முடிந்து விடும்.

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कुंडली में 12 भाव होते हैं। कैसे ज्योतिष द्वारा रोग के आंकलन करते समय कुंडली के विभिन्न भावों से गणना करते हैं आज इस पर चर्चा करेंगे।
कुण्डली को कालपुरुष की संज्ञा देकर इसमें शरीर के अंगों को स्थापित कर उनसे रोग, रोगेश, रोग को बढ़ाने घटाने वाले ग्रह


रोग की स्थिति में उत्प्रेरक का कार्य करने वाले ग्रह, आयुर्वेदिक/ऐलोपैथी/होमियोपैथी में से कौन कारगर होगा इसका आँकलन, रक्त विकार, रक्त और आपरेशन की स्थिति, कौन सा आंतरिक या बाहरी अंग प्रभावित होगा इत्यादि गणना करने में कुंडली का प्रयोग किया जाता है।


मेडिकल ज्योतिष में आज के समय में Dr. K. S. Charak का नाम निर्विवाद रूप से प्रथम स्थान रखता है। उनकी लिखी कई पुस्तकें आज इस क्षेत्र में नए ज्योतिषों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
प्रथम भाव -
इस भाव से हम व्यक्ति की रोगप्रतिरोधक क्षमता, सिर, मष्तिस्क का विचार करते हैं।


द्वितीय भाव-
दाहिना नेत्र, मुख, वाणी, नाक, गर्दन व गले के ऊपरी भाग का विचार होता है।
तृतीय भाव-
अस्थि, गला,कान, हाथ, कंधे व छाती के आंतरिक अंगों का शुरुआती भाग इत्यादि।

चतुर्थ भाव- छाती व इसके आंतरिक अंग, जातक की मानसिक स्थिति/प्रकृति, स्तन आदि की गणना की जाती है


पंचम भाव-
जातक की बुद्धि व उसकी तीव्रता,पीठ, पसलियां,पेट, हृदय की स्थिति आंकलन में प्रयोग होता है।

षष्ठ भाव-
रोग भाव कहा जाता है। कुंडली मे इसके तत्कालिक भाव स्वामी, कालपुरुष कुंडली के स्वामी, दृष्टि संबंध, रोगेश की स्थिति, रोगेश के नक्षत्र औऱ रोगेश व भाव की डिग्री इत्यादि।
#ज्योतिष_विज्ञान #मंत्र_विज्ञान

ज्योतिषाचार्य अक्सर ग्रहों के दुष्प्रभाव के समाधान के लिए मंत्र जप, अनुष्ठान इत्यादि बताते हैं।

व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति ही उसकी कुंडली बन जाती है जैसे कि फ़ोटो खींच लिया हो और एडिट करना सम्भव नही है। इसे ही "लग्न" कुंडली कहते हैं।


लग्न के समय ग्रहों की इस स्थिति से ही जीवन भर आपको किस ग्रह की ऊर्जा कैसे प्रभावित करेगी का निर्धारिण होता है। साथ साथ दशाएँ, गोचर इत्यादि चलते हैं पर लग्न कुंडली का रोल सबसे महत्वपूर्ण है।


पृथ्वी से अरबों खरबों दूर ये ग्रह अपनी ऊर्जा से पृथ्वी/व्यक्ति को प्रभावित करते हैं जैसे हमारे सबसे निकट ग्रह चंद्रमा जोकि जल का कारक है पृथ्वी और शरीर के जलतत्व पर पूर्ण प्रभाव रखता है।
पूर्णिमा में उछाल मारता समुद्र का जल इसकी ऊर्जा के प्रभाव को दिखाता है।


अमावस्या में ऊर्जा का स्तर कम होने पर वही समुद्र शांत होकर पीछे चला जाता है। जिसे ज्वार-भाटा कहते हैं। इसी तरह अन्य ग्रहों की ऊर्जा के प्रभाव होते हैं जिन्हें यहां समझाना संभव नहीं।
चंद्रमा की ये ऊर्जा शरीर को (अगर खराब है) water retention, बैचेनी, नींद न आना आदि लक्षण दिखाती है


मंत्र क्या हैं-
मंत्र इन ऊर्जाओं के सटीक प्रयोग करने के पासवर्ड हैं। जिनके जप से संबंधित ग्रह की ऊर्जा को जातक की ऊर्जा से कनेक्ट करके उन ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम किया और शुभ प्रभाव को बढ़ाया जाता है।