#मठ_का_महंत
मर्यादा पुरुषोत्तम महाराज श्री राम की राज्य सभा इंद्र, यम और वरुण की सभा के समकक्ष थी। एक दिन श्री लक्ष्मण जी को प्रभु ने आज्ञा दी कि देखो बाहर कोई व्यवहारी या प्रर्थी तो नहीं है,
कोई हो तो बुला कर लाओ और उसकी बात सुनी जाए।
ब्राह्मण को सम्मान पूर्वक हाथी पर चढ़ा कर भेज दिया गया। सभा में सब ने आश्चर्य से पूछा, तुमने उसे श्राप क्यों नहीं दे डाला?
श्वान बोला, आप लोगों को इसका रहस्य विदित नहीं है, मैं पूर्व जन्म में वहीं का कुलपति था।