#MangalPandey
(19 July, 1827)
A heartful tribute to the First Freedom Fighter MangalPandey on his Birth Anniversary, who's sacrifice sparked the revolt of 1857. His sacrifice and courage will always be remembered. 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Born on 19 July 1827 at Nagwa, Ballia district, of UP and Sacrificed his life on 8 April 1857 (aged 29) Barrackpore, Calcutta, Bengal Province, British India.
Mangal Pandey was an Indian soldier who played a key part in events immediately preceding the outbreak of the Indian rebellion of 1857. He was a sepoy in the 34th Bengal Native Infantry regiment of the British East India Company.
Remembering some of his famous quotes on his birth anniversary to pay him a warm tribute for his supreme sacrifice for our Great Nation.

1- आज तक आपने हमारी वफादारी देखी थी अब हमारा क्रोध देखिये।

2- यह आज़ादी की लड़ाई है, ग़ुज़रे हुए कल से आज़ादी,आने वाले कल के लिए।
3- बन्दूक बड़ी बेवफा माशूका होती है कब किधर मुँह मोड़ ले कोई भरोसा नहीं।

4- किसी भी धर्म के लोगों का गोंमांस खाना एक पाप है, और यदि आप हिन्दू है तो ये एक कलंक भी है।

5-हमारी आज़ादी के लिए लड़ाई एक चिंगारी है जो भविष्य में विकराल रूप लेगी।

🇮🇳🇮🇳🇮🇳Bharat Mata ki Jai🇮🇳🇮🇳🇮🇳

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कबीरदास जी की पगड़ी
#कहानी
एक बार संत कबीर ने बड़ी कुशलता से पगड़ी बनाई। झीना- झीना कपडा बुना और उसे गोलाई में लपेटा। हो गई पगड़ी तैयार। वह पगड़ी जिसे हर कोई बड़ी शान से अपने सिर सजाता हैं।


यह नई नवेली पगड़ी लेकर संत कबीर दुनिया की हाट में जा बैठे। ऊँची-ऊँची पुकार उठाई, 'शानदार पगड़ी ! जानदार पगड़ी ! दो टके की भाई ! दो टके की भाई !' एक खरीददार निकट आया। उसने घुमा- घुमाकर पगड़ी का निरीक्षण किया। फिर कबीर जी से प्रश्न किया, 'क्यों महाशय एक टके में दोगे क्या ?'

कबीर जी ने अस्वीकार कर दिया, 'न भाई ! दो टके की है। दो टके में ही सौदा होना चाहिए।' खरीददार भी नट गया। पगड़ी छोड़कर आगे बढ़ गया। यही प्रतिक्रिया हर खरीददार की रही।

सुबह से शाम हो गई। कबीर जी अपनी पगड़ी बगल में दबाकर खाली जेब वापिस लौट आए।

थके- माँदे कदमों से घर-आँगन में प्रवेश करने ही वाले थे कि तभी एक पड़ोसी से भेंट हो गई। उसकी दृष्टि पगड़ी पर पड़ गई। क्या हुआ संत जी, इसकी बिक्री नहीं हुई ? पड़ोसी ने जिज्ञासा की। कबीर जी ने दिन भर का क्रम कह सुनाया।

पड़ोसी ने कबीर जी से पगड़ी ले ली, आप इसे बेचने की सेवा मुझे दे दीजिए। मैं कल प्रातः ही बाजार चला जाऊँगा।

अगली सुबह कबीर जी के पड़ोसी ने ऊँची-ऊँची बोली लगाई, 'शानदार पगड़ी ! जानदार पगड़ी ! आठ टके की भाई ! आठ टके की भाई !'
अष्टभुजीदेवी- श्री कृष्ण की बहन 🙏🙏
#Thread
द्वापर युग से जुड़ी हुई यह अष्टभुजा मां भगवान कृष्ण की बहन है। श्रीमद्भागवत पुराण की कथा अनुसार पापी कंस ने अपनी मृत्यु के डर से अपनी बहन देवकी को पति सहित कारागार में कैद कर लिया था.


अपने विनाश के भय से वह देवकी की कोख से जन्म लेने वाले हर बच्चे को वध करता गया। देवकी के आठवें गर्भ से जन्में श्रीकृष्ण को वसुदेवजी ने कंस से बचाने के लिए रातोंरात यमुना नदी को पार गोकुल में नन्दजी के घर पहुंचा दिया था


तथा वहां यशोदा के गर्भ से पुत्री के रूप में जन्मीं भगवान की शक्ति योगमाया को चुपचाप वे मथुरा के जेल में ले आए थे। बाद में जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म का समाचार मिला तो वह कारागार में पहुंचा।


उसने उस नवजात कन्या को पत्थर पर पटककर जैसे ही मारना चाहा, वह कन्या अचानक कंस के हाथों से छूटकर आकाश में पहुंच गई और उसने अपना दिव्य स्वरूप प्रदर्शित कर कंस के वध की भविष्यवाणी की और अंत में वह भगवती विन्ध्याचल वापस लौट गई और अष्टभुजी देवी के रूप मे स्थापित हुई।


यह विन्ध्यवासिनी देवी को समर्पित मन्दिर से तीन किमी की दूरी पर स्थित है। मन्दिर चमत्कारिक पहाड़ियों की पृष्ठभूमि में स्थित है और अपने शांत और सुन्दर दृश्यों के कारण भक्तों के साथ-साथ पर्यटकों के बीच भी लोकप्रिय है।

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