Authors श्रीमाली हितेश अवस्थी

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आइऐ आज इंदिरा गांधी की हिंदू विरोधी नीतीयों के बारे में जानते है, जिसे सबको जानने का अधिकार है

इंदिरा गांधी के बनाये नियम :

इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़ा था।
धर्मनिरपेक्षता यानी कि सरकार और कानून धार्मिक...

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आधार पर किसी के भी साथ भेदभाव भी नहीं कर सकते।सभी धर्मों को एक समान माना जाएगा। सभी धर्म के लोगों को एक जैसे ही अधिकार प्राप्त होंगे।तो आइए आज इस धर्मनिरपेक्षता की सच्चाई को जान लिया जाए-

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शादी शगुन: केवल मुस्लिम लड़कियों की शादी पर 51,000 रु

नई उड़ान: UPSC & PSC की परीक्षाओं के लिए हर मुस्लिम की एक लाख की मदद

सीखो और कमाओ: हर मुस्लिम प्रतिभागी को 25,000

नई मंजिल : हर मुस्लिम प्रतिभागी को 56,500

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नई रोशनी : मुस्लिम महिलाओं में नेतृत्व क्षमता के लिए 2,25,000

हमारी धरोहर योजना : मुस्लिम प्रतिभागी को 3,32,000 प्रति वर्ष

अल्पसंख्यक पिछड़ों को *बीस लाख* तक के रियायती ऋण

उस्ताद योजना : हर अल्पसंख्यक अध्येता को नौ लाख बारह हजार रू

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नया सवेरा : मुस्लिम प्रतिभागी को कोचिंग के लिए भोजन आवास के साथ 1,00,000

मौलाना आजाद फेलोशिप : मुस्लिम प्रतिभागी को 28,000 प्रतिमाह व मकान भत्ता

मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना कक्षा 6 से 10 तक : मुस्लिम प्रतिभागी को 12,000 रू प्रतिवर्ष

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महात्मा की खाल ओढ़े ऐक भेड़िये का सच!!

मनु बेन के आइने में गांधी:

मनु बेन महात्मा गाँधी के अंतिम वर्षों की निकट सहयोगी थीं। मनु को प्रायः गाँधीजी की पौत्री कहा जाता है। वास्तव में यह रिश्ता बहुत दूर का था। वह गाँधीजी के चाचा की प्रपौत्री थी।

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लगभग अशिक्षित, सोलह-सत्रह वर्ष की लड़की, जिस के पिता जयसुखलाल गाँधी एक लाचार से साधारण व्यक्ति थे। उसी मनु को लेकर गाँधी के ‘ब्रह्मचर्य प्रयोग’ न केवल गाँधी के जीवन के अंतिम प्रयोग हैं, बल्कि सर्वाधिक विवादास्पद भी।

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गाँधी की जिद और उन के परिवार व निकट सहयोगियों के विरोध का यह दौर 1946-1947 ई. के दौरान कई महीने चला। इस पर गाँधी से उन के पुत्र देवदास तथा सरदार पटेल, किशोरलाल, नरहरि, आदि सहयोगियों ने गाँधी से आंशिक/ पूर्ण संबंध-विच्छेद तक कर लिया था।

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जिन लोगों ने तीखा विरोध किया उन में ठक्कर बापा, बिनोबा भावे, घनश्याम दास बिड़ला, आदि भी थे। आजादी से पहले एक बार सरदार पटेल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि गांधी जी के ब्रह्मचर्य के ये प्रयोग बन्द कर दिए जाने चाहिए। परन्तु नेहरू ने कभी इन प्रयोगों पर प्रश्न नही उठाया।

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शायद इसी कारण सरदार पटेल को प्रधानमंत्री नही बन सके। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 25 जनवरी 1947 को गांधी जी को पत्र लिखा था, जिसमें उनके प्रयोग को भयंकर भूल बताते हुए उसे रोकने को कहा था। पटेल ने लिखा था कि ऐसे प्रयोग से उनके अनुयायियों को गहरी पीड़ा होती है।

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#थ्रेड
४ वेद; जानिए किस वेद में क्या है...!

वेद दुनिया के प्रथम धर्मग्रंथ है।
वेद के विभाग चार है:
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

ऋक को धर्म, यजुः को मोक्ष, साम को काम, अथर्व को अर्थ भी कहा जाता है।

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वेदों के उपवेद : ऋग्वेद का आयुर्वेद, यजुर्वेद का धनुर्वेद, सामवेद का गंधर्ववेद और अथर्ववेद का स्थापत्यवेद ये क्रमशः चारों वेदों के उपवेद बतलाए
गए हैं।

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1.ऋग्वेद :
ऋक अर्थात् स्थिति और ज्ञान। ऋग्वेद सबसे पहला वेद है जो पद्यात्मक है। इसके 10 मंडल (अध्याय) में 1028 सूक्त है जिसमें 11 हजार मंत्र हैं। इस वेद की 5 शाखाएं हैं - शाकल्प, वास्कल, अश्वलायन, शांखायन, मंडूकायन।

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इसमें भौगोलिक स्थिति और देवताओं के आवाहन के मंत्रों के साथ बहुत कुछ है। ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना, स्तुतियां और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है। इसमें जल चिकित्सा, वायु चिकित्सा, सौर चिकित्सा, मानस चिकित्सा और हवन द्वारा चिकित्सा आदि की भी जानकारी मिलती है। 👇👇

ऋग्वेद के दसवें मंडल में औषधि सूक्त यानी दवाओं का जिक्र मिलता है। इसमें औषधियों की संख्या 125 के लगभग बताई गई है, जो कि 107 स्थानों पर पाई जाती है।

2.यजुर्वेद :
यजुर्वेद का अर्थ : यत् + जु = यजु। यत् का अर्थ होता है गतिशील तथा जु का अर्थ होता है आकाश।

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हिंदू परम्पराओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारण अवश्य जाने!

1.कान छिदवाने की परम्परा:

भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क-दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है..

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और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

2. माथे पर कुमकुम/तिलक

महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। वैज्ञानिक तर्क–आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। #सनातनधर्मसर्वोपरि 👇👇

माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है।
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है

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3. जमीन पर बैठकर भोजन

भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है। वैज्ञानिक तर्क– पलती मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्तिष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है।
#सनातन_धर्म

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इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।

4. हाथ जोड़कर नमस्ते करना

जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। वैज्ञानिक तर्क– जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं..

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